एक सन्देश-

यह ब्लॉग समर्पित है साहित्य की अनुपम विधा "पद्य" को |
पद्य रस की रचनाओ का इस ब्लॉग में स्वागत है | साथ ही इस ब्लॉग में दुसरे रचनाकारों के ब्लॉग से भी रचनाएँ उनकी अनुमति से लेकर यहाँ प्रकाशित की जाएँगी |

सदस्यता को इच्छुक मित्र यहाँ संपर्क करें या फिर इस ब्लॉग में प्रकाशित करवाने हेतु मेल करें:-
kavyasansaar@gmail.com
pradip_kumar110@yahoo.com

इस ब्लॉग से जुड़े

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

जिनके गलत सुलूक रहे हैं।
शंख वही अब फूक रहे हैं।

भरा गन्‍दगी से अन्‍तर्मन,
वो औरों पर थूक रहे हैं।

कोयल तो आश्‍चर्यचकित है,
सारे कौवे कूक रहे हैं।

राम बने फिरते हैं अब वो,
कल तक जो शम्‍बूक रहे हैं।

निकले हैं सागर मन्‍थन को,
कभी कूप मन्‍डूक रहे हैं।

काटे गये अँगूठे फिर भी,
कहॉं निशाने चूक रहे हैं। 

रचनाकार-नागेन्‍द्र अनुज,
प्रतापगढ़ ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।

हलचल अन्य ब्लोगों से 1-